
छात्रावासों की सुरक्षा पर उठे सवाल, शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं
महेश्वर/करही।
करही के कन्या एवं बालक छात्रावासों की सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। संबंधित अधिकारियों को कई बार व्हाट्सएप द्वारा व मौखिक रूप से अवगत कराने के बावजूद अब तक किसी प्रकार की ठोस जांच या कार्रवाई सामने नहीं आई है।
सूत्रों के अनुसार, कई छात्रावासों में अधीक्षक के लिए निवास गृह उपलब्ध होने के बावजूद वे वहां निवास नहीं कर रहे हैं। वहीं कुछ स्थानों पर वार्डन द्वारा अपने पति एवं परिवार के साथ छात्रावास परिसर में निवास कररही है। विशेषकर कन्या छात्रावासों में बाहरी व्यक्तियों की मौजूदगी को लेकर अभिभावकों में चिंता व्याप्त है।
जानकारी यह भी सामने आई है कि कुछ अधीक्षक तीन वर्ष से अधिक समय से एक ही छात्रावास में पदस्थ हैं, जबकि कुछ मामलों में यह अवधि 15 वर्ष तक बताई जा रही है। नियमों के अनुसार समय-समय पर स्थानांतरण की प्रक्रिया अपेक्षित होती है, किंतु लंबे समय से जमे अधिकारियों को लेकर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर प्रश्न उठ रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं की गई, तो छात्रावासों की सुरक्षा एवं अनुशासन व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
अब देखना यह है कि प्रशासन इन शिकायतों को गंभीरता से लेकर जांच कराता है या फिर मामला यथावत बना रहता है।
जब सवाल सुरक्षा का हो, तो चुप्पी क्यों?
छात्रावास केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य की नींव होते हैं। विशेषकर कन्या छात्रावासों में सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि अधिछिका परिवार के साथ निवास करते है। और बाहरी व्यक्तियों का आवागमन होता है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
प्रशासन की जिम्मेदारी केवल आदेश जारी करना नहीं, बल्कि नियमों का पालन सुनिश्चित करना भी है। वर्षों से एक ही स्थान पर जमे अधिकारियों का स्थानांतरण न होना भी पारदर्शिता पर प्रश्नचिन्ह लगाता है।
जरूरत है कि प्रशासन बिना किसी पक्षपात के स्वतंत्र जांच कराए और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई करे।
क्योंकि जब सवाल बेटियों की सुरक्षा का हो, तब किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं हो सकती।


